दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में उत्कृष्ट कार्य करने वाली बीसी सखियों का हुआ सम्मान

admin
admin
7 Min Read

उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को भी सम्मानित किया गयाडिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने डुएल ऑथेन्टिकेशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को भी सम्मानित किया गयारायपुर. सीएससी द्वारा डिजिटल मड़ई का आयोजन डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने डुएल ऑथेन्टिकेशन उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को भी सम्मानित किया गया उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को भी सम्मानित किया गया उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को भी सम्मानित किया गया उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को भी सम्मानित किया गया उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को भी सम्मानित किया गयाछत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत डिजिटल फाइनेंस के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने वाली 15 बीसी सखियों को आज सम्मानित किया गया। स्वसहायता समूहों में डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने बैंकों द्वारा शुरू की गई दोहरी प्रमाणीकरण (Dual Authentication) की प्रक्रिया में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 12 बैंकर्स का भी सम्मान किया गया। डिजिटल फाइनेंस के लिए तकनीकी सहायता एजेंसी सीएससी ई-गर्वनेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड द्वारा आज रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित डिजिटल मड़ई में बीसी सखियों और बैंकर्स को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बीसी सखियों की सफलता की कहानियों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।डिजिटल मड़ई कार्यक्रम में बीसी सखी के रूप में सर्वाधिक आय अर्जित करने वाली धमतरी जिले की सुनीता साहू, रायपुर की प्रियंका साहू, कोरिया की रनिया कुमारी तथा राजनांदगांव जिले की ऋतु श्रीवास और ममता पटेल को सम्मानित किया गया। स्थानीय लोगों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए सर्वाधिक ट्रांजैक्शन करने वाली बीसी सखियों कोरिया जिले की सुनीता कुमारी, बलरामपुर-रामानुजगंज की संगीता खलखो, कांकेर की पुष्पा बाई, गरियाबंद की खेमेश्वरी तिवारी और रायगढ़ की नेमिका पटेल को भी डिजिटल मड़ई में पुरस्कृत किया गया। बीसी सखी के रूप में ग्रामीणों को सर्वाधिक सेवाएं प्रदान करने वाली रायपुर जिले की नीलम साहू, कबीरधाम की संगीता भास्कर, राजनांदगांव की नागेश्वरी सिन्हा, रायगढ़ की कलावती राठिया और दुर्ग की तारा साहू को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में इन बीसी सखियों ने अपने काम के अनुभव भी साझा किए।डिजिटल मड़ई में स्वसहायता समूहों में डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने बैंकों द्वारा शुरू की गई दोहरी प्रमाणीकरण (Dual Authentication) की प्रक्रिया में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शाखा प्रबंधकों को भी सम्मानित किया गया। इनमें छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक कुरंदी, बस्तर के शाखा प्रबंधक सी.आर. ठाकुर, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक छाती, धमतरी के शाखा प्रबंधक प्रदीप सिंह ठाकुर, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया धमतरी के शाखा प्रबंधक बाबुल सिंह, बैंक ऑफ महाराष्ट्र जामगांव (जी), धमतरी के शाखा प्रबंधक दिलीप बेहरा, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक हल्बा, कांकेर के शाखा प्रबंधक साहिल केशरवानी, बैंक ऑफ बड़ौदा कसवाही, कांकेर के शाखा प्रबंधक मोतीलाल पंडा, भारतीय स्टेट बैंक आतुरगांव, कांकेर के शाखा प्रबंधक पुरुषोत्तम परयाते, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक विश्रामपुरी, कोंडागांव के शाखा प्रबंधक सी.एस. मंडावी, बैंक ऑफ बड़ौदा समोदा, रायपुर के शाखा प्रबंधक हेमंत महाजन, पंजाब नेशनल बैंक माना, रायपुर के शाखा प्रबंधक ब्रीजिर टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक खैरागढ़ के शाखा प्रबंधक अनुज खरे और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक उदयपुर, सरगुजा के शाखा प्रबंधक सत्यवीर सिंह शामिल हैं।पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री प्रसन्ना आर. ने डिजिटल मड़ई को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2030 तक पूरी दुनिया में बहुआयामी गरीबी को दूर करने का लक्ष्य रखा गया है। गरीबी दूर करने के लिए वित्तीय समावेशन जरूरी है। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे वित्तीय समावेशन के फलस्वरूप बहुआयामी गरीबी में कमी आई है। आधुनिक तकनीकों ने इसे सुगम बनाया है। राज्य में बीसी सखियां इनका उपयोग कर दूरस्थ अंचलों में बैंकिंग सुविधाएं प्रदान कर रही हैं। उन्होंने बीसी सखियों के काम की प्रशंसा करते हुए कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में इस काम में आ रही समस्याओं का निराकरण भी किया जाना चाहिए। श्री प्रसन्ना ने कहा कि वित्तीय समावेशन के लिए बैंक अच्छा काम कर रहे हैं और उनका सहयोग मिल रहा है। इसमें सीएससी का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है। उनके कार्यों की भी दक्षता बढ़ी है।राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की संचालक श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने कार्यक्रम में बीसी सखियों की उपलब्धि के लिए सीएसी और बिहान की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि घर की जिम्मेदारियों को पूर्ण करने के बाद महिलाएं बाहर निकलकर भी काम कर रही हैं। बीसी सखियां दूरस्थ अंचलों में बैंकिंग सेवाएं देने के साथ ही खुद की आमदनी भी बढ़ा रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में अभी 3790 बीसी सखियां काम कर रही हैं। सीएससी के छत्तीसगढ़ एवं ओड़िशा प्रमुख श्री मदन मोहन राउत ने अपने संबोधन में कहा कि सीएससी तकनीकी सहायता प्रदान कर लोगों के जीवन में बदलाव ला रही है। वित्तीय समावेशन के लिए सीएससी यहां 74 हजार स्वसहायता समूहों के साथ काम कर रही है। राज्य में 150 से ज्यादा बीसी सखियां हर महीने छह हजार रुपए से अधिक कमा रही हैं।डिजिटल मड़ई को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के चेयरमैन श्री आई.के. गोहिल, संस्थागत वित्त की संचालक श्रीमती शीतल सारस्वत वर्मा और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में डिजिटल फाइनेंस के नोडल अधिकारी श्री वीकेश अग्रवाल ने भी संबोधित किया। उन्होंने बैंकों की कमी वाले क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने में बीसी सखियों के योगदान को रेखांकित करते हुए उनकी हौसला अफजाई की। डिजिटल मड़ई में वीडियो फिल्म के जरिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली बीसी सखियों के कार्यों को साझा भी किया गया। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त संचालक श्री आर.के. झा, श्री चन्द्रप्रकाश पात्रे, सीएससी के श्री जय नारायण पटेल, मनीष शुक्ला, विकास तिवारी तथा एसआरएलएम के विभिन्न जिलों से आए जिला कार्यक्रम प्रबंधक भी कार्यक्रम में मौजूद थे।क्रमांक-3077/कमलेश

Ro No. 12242/26
Ad imageAd image

Share this Article